कविताएँ

शेर ..२

दिल में हर घड़ी महक फूटती रहे 'रंजन' इंतज़ार की॥
ऐ-खुदा ! लुत्फ़े-मोहब्बत के एहसास का क्या कहना ॥

राजेंद्र ''रंजन''