कविताएँ

कविता..३ ..सपने देख !

हर सपना एक भ्रम है...
हर भ्रम जीना सिखाता है...
जीना -  मरना ...
एक चुनौती है...
हर आदमी के ...
हर चुनौती एहसास है ॥
सपने कभी सावन होते हैं...
तो कभी बिरहा की लंबी रात...
कभी तपती धूप है सपने...
तो कभी मधुमास ...
ये भीसच है कि 
कुछ सपने सच भी होते हैं॥
कुछ झूठे ...
कुछ हँसते -कुछ रोते ...
ये सपने अपने होकर भी...
होते हैं पराए  ...
जो सपना औरों की
खुशी के लिए हो ....
'रंजन 'तू वो ही ।
 सपने  देख॥