कविताएँ

ग़ज़ल...८ ..खुबसूरत शहर..

खूबसूरत शहर की ये कैसी शाम है।
छौरे  आवारा और मुन्नी बदनाम है॥

यार/प्यार दोस्तों का मिजाज ॥
बे-वफ़ाई यंहा सारे-आम है॥

जात/धर्म  की सजती हैं महफिलें॥
हर जगह   इंसाननियत गुमनाम है ।

फख्र करें रंजन तो किस पर करें॥
भरोसे-मंदों के हाथों में भरे जाम हैं।

छौरे आवारा और मुन्नी बदनाम है॥
खूबसूरत शहर की ये कैसी शाम है॥

राजेंद्र रंजन ...