कविताएँ

कविता ..४ यकीन कर..

असलियत से नज़र न फेर.. 
दिखावों में यकीन न कर..
जीवन का सहारा खुद ही बन..
अपने यकीन पर ही यकीन कर..
अपने जज़्बातों को क़ाबू कर..
हर कामयाबी सब्र मांगती है..
तुम नाकामयाब नहीं हो.. 
अंधी हसरतें नाखुशी का सबब हैं..
दर्द की झोली तेरा हौसला है..
सब से दुआएँ लेता चल ..
मंज़िलों की ताकत तेरी ही..
काबलियत और तसल्ली है... 
अँधेरों में टटोलते हाथ ..
आशावादी तो होते हैं मगर .. 
पर रातों-रात किसी को..
सच्ची शोहरत नहीं मिलती ..
जंहा हसरतों का भ्रम है 'रंजन' 


राजेंद्र रंजन .