कविताएँ

ग़ज़ल ११..हर मंजर रंगी...


ग़ज़ल ३८:-

हर मंज़र  रंगी नज़र आता है...
पलकें बंद करे  तो कैसे करें ?

रहनुमाओं के इशारों पर कैसे  चले ....
रहनुमाई अता न करे तो कैसे करें?

जानिसारों की शहादत है ये दुनिया ...
शहादत सियासत करे तो कैसे करें ?

जश्ने-मोहब्बत घड़ी दो घड़ी है...
कोई हकीकत छुपाए तो कैसे करें ?

बाग्बाँ  बहारां को  बेचैन है  'रंजन' ...
मंजरे-गुल न  गुनगुनाए तो कैसे करें ?

राजेंद्र रंजन...