कविताएँ

ग़ज़ल .. १२..किस्सा-कहानी ..

ग़ज़ल ३५ :-( दीवानों के नाम )

किस्सा -कहानी पुरानी छोड़ दो यारों ...
हकीकत में आज वफ़ा नहीं मिलती ...

लोग मिलते हैं और बिछड़ जाते हैं...
दिली -सुकून दे वो सदा नहीं मिलती ...

पहले बात फिर भरोसा और भूल जाना ...
खुदगर्ज़-यारों को सजा नहीं मिलती ...

खुबसूरत बलाओं की मीठी-मीठी बातें ...
हुस्ने-कालकोठरी में हवा नहीं मिलती ...

रांझा-मजनू- फ़रियाद और 'रंजन 'सब हैं पागल ...
हीर-लैला- शीरी को भुलाने की दवा नहीं मिलती ...

राजेंद्र रंजन