कविताएँ

कविता..५..जाग जाओ..

जाग जाओ...
कद्रदानों / मेहरबानों....
ये लो , नया -वर्ष आ गया...
क्या कहा ?
आम -आदमी का ज़माना ...
आ गया...
पानी मुफ्त / बिजली फ्री ..
चावल -गेंहू टका सेर...
खाओ-पियो...
हो जाओ ढेर ...
फिर भी ...
कर्म ही पूजा है..
और नहीं कोई दूजा है..
अगर आज ...
हाथ -पांव नहीं हिलाओगे...
तो बच्चों को ...
क्या खिलाओगे ?
राजेंद्र रंजन...