कविताएँ

कविता ..६..प्रश्न-चिन्ह..

प्रश्न-चिन्ह _
असली आम आदमी ...
नौटंकी नहीं करता ...
बकवास बिलकुल नहीं...
सिर्फ सहता है...
मौसम की मार...
और सुनता है..
झूठे -नेताओं के वादे...
हर गली पर देखता है...
योजनाओं के विज्ञापन ...
काश ! कोई सच्चे दिल से...
कोई मानवता का मर्म समझे...
और मानव को मानव समझे...
पर हकीकत में ऐसा होगा नहीं...
क्योंकि वफादारी और इमानदारी ...
के पलड़े में कुत्ते का पलड़ा है भारी..