कविताएँ

ग़ज़ल..14.अपना अपना ब्यान है..प्यारे.

अपना -अपना ब्यान है प्यारे ..
जुबां नहीं तीर-कमान है प्यारे ..

लोग कहते हैं सियासत जिसे ..
कुर्सियों की अदद दुकान है प्यारे ..

फलक खुला हैं आरजुयों का..
अपनी -अपनी उड़ान है प्यारे ..

नया शहर दोस्ती भी नई-नई ..
सबकी खतरे में जान है प्यारे ..

जियो और जीने दो सबको "रंजन"..
ये दुनिया किराये का मकान है प्यारे ..

राजेंद्र रंजन..