कविताएँ

ग़ज़ल...१ अभी बच्चे ...

अभी बच्चे ये राज समझ नहीं पाते हैं ,
घरौंदे रेत के क्यूँ बनके बिखर जाते हैं ..

बड़े हैं आप तो बँटवारा नेक कीजिये ,
हम हैं गरीब बदी राह से उठाते हैं ..

अमीर के लियें हर धूप हरी होती हैं ,
गरीब, खेत तो बारिश में झुलस जाते हैं..


 गाँव में न वो गीत न  चोपाल -अलाव ,
हर तरफ शहरी अंदाज़ झिलमिलाते हैं ..

मिले ख़ुशी तो ज़माने में बाट दे "रंजन ",
अकेले जाना अगर गम तुझे बुलाते हैं ..

राजेंद्र रंजन ..