कविताएँ

ग़ज़ल..15 अरे यार, बहुत देख ली..दुनिया


अरे यार ! बहुत दुनिया देख ली..
दोस्तों की भी कद्रदानी देख ली..

आँखे नम और पैरों में छाले ..
प्यार की उम्दा निशानी देख ली..

लाखों का हुजूम और तन्हा इंसा..
आज हमने नई राजधानी देख ली..

बुदू-बक्सा पर रोज गिटर-पिटर..
बुद्धिमानों की बदजुबानी देख ली..

पवित्र-रिश्ता ,रंगरसिया , उतरन ..
साँस-बहु की भी कहानी देख ली..

चन्दन-टीके की जगह टेटू ' रंजन '
नई -पीढ़ी की नई जवानी देख ली..

राजेंद्र रंजन