कविताएँ

ग़ज़ल..२२ .यादों के घने साये जाते नहीं.

यादों के घने साये जाते नहीं..
बीते लम्हें भुलाये जाते नहीं..

हर रात कसम लेकर सोता हूँ..
टूटे रिश्ते निभाये जाते नहीं..

वफ़ा-बेवफा सभी यार देंखे हैं..
स्वार्थी नाम गिनाये जाते नहीं..

तिनका-तिनका बना आशियाना ..
झूमते घोसलें गिराये जाते नहीं..

अपना लहू पिलाकर पाला जिसने..
माँ-बाप के क़र्ज़ चुकाये जाते नहीं..

राजेंद्र रंजन..