कविताएँ

ग़ज़ल..२४ ..मत कहो उड़ान बाकी है..

मत कहो उड़ान बाकी है..
कहो अभी जान बाकी है..

गुलाब ताजगी और खुशबु..
बागवां की शान बाकी है..

जमीं क्या आसमां क्या ?
हथेली में जान बाकी है..

दुनिया से भी क्यों डरूं..
खुदा मेहरबान बाकी है..

गर तू संग है सफ़र में' रंजन '
फिर कौन सा कारवां बाकी है..

राजेंद्र रंजन ..