कविताएँ

ग़ज़ल ..२७ ..सच बोलने पर तूफ़ान उठा लेते हो..

सच बोलने पर तूफ़ान उठा लेते हो..
झूठे आदमी को गले से लगा लेते हो..

मत किया करों नाहक तरक्की की बातें ..
मजबूत दीवार पर रंग-रोगन लगा देते हो..

बकर-बकर करने से अब बाज़ आ जाओ..
खामोश रहने वालों को रोज सजा देते हो..

हर गली- चौराहों पर नौटंकी तो देखो..
गरीब की रोजी-रोटी डंडे से हटा देते हो..

धरम-करम की बातें किया न करो 'रंजन '
जीते-जागते लोगों को जिन्दा जला देते हो..

राजेंद्र रंजन..