कविताएँ

कता..३

नूरे-इलाही को बुला कर तो देख..
खुदा की राह में तो आकर तो देख ..
भर जायेंगी सारी मुरादों की झोलियाँ ..
मुरझाये हुये चेहरे खिला कर तो देख ..
राजेंद्र रंजन ..