कविताएँ

kavita ..

पापा कहते हैं..बेटा काम करेगा..
बेटा कहता है..मैं काम क्यों करूँ ?
हमारे पापा तो बहुत कर्मवान हैं..

लोग कहते हैं बेटी तो मेहमान है..
हर बेटी जानती है सच्चाई क्या है..
फिर मेहमान का कैसा अपमान है ?

दोस्त होते ही हैं यार ! बुरे दिनों के लिए..
हर दोस्त जानता है बुरे दिन कैसे आये ?
क्या हर दोस्त दोस्ती का यंहा कद्रदान है ..

सियासत में रहना है तो करना ही पड़ता है..
भाषावाद -छेत्रवाद और लिंगभेद /जातिभेद ..
समानता का अधिकार तो बस प्रावधान है..

राजेंद्र रंजन..