कविताएँ

2 sher...

१:-
आदतन धोखे खाने का मज़ा और ही है,,,
यूँ तो धोखे से धोखा कोई दे नहीं पाया,,,

२:-
आदतन धोखा खाना सब के बूते की बात नहीं ,,,
ए- दोस्त धोखों में ही काट दी जिन्दगी अपनी ,,,

राजेंद्र रंजन ...