कविताएँ

kataa..

क्या थी उनकी मजबूरियां क्यों वो बे-वफ़ा निकले ?
खतावार भी सभी यार उनके दर से बे-खता निकले ..
बहुत शिद्दत से निभाई थी तुमने दोस्ती उनसे ' रंजन '
गोया यही वजय थी तुम खतावार और बे-वफ़ा निकले..
राजेंद्र रंजन .