कविताएँ

gazal..30..क्या खोया - पाया पूछा न करो

क्या खोया - पाया पूछा न करो ..
क्यों रोती हैं आँखें पूछा न करो..

तुम थे तो लगता सब कुछ था..
कैसे थे बीते दिन पूछा न करो..

यार कल भी दुनिया पागल थी..
आज कैसी है वो पूछा न करो ..

मेरे रोने पर खफा होते हो..
क्यों हँसता हूँ पूछा न करो ..

बागबां हैं तो बहारें आएँगी ' रंजन '
कैसे उझड़ता है चमन पूछा न करो..

राजेंद्र ' रंजन..