कविताएँ

ग़ज़ल .4.खुदा खैर करे ..

आ गये मेरे  दिलदार खुदा खैर करे,
तिरछी नजर  करे वार खुदा खैर  करे ..

माजी में तो तल्ख जुबान थी लेकिन ,
आज बातों  में  है प्यार खुदा खैर करे ...

वो तेरी चाह या जिन्दगी की हो बाजी,
आपके हो गये हम  यार खुदा  खैर करे... 

पर्दे में कल जिन्हें देना जनाब था मुश्किल,
छप गया उनका इश्तहार  खुदा खैर करे ..

प्यार करने का शऊर  उन्हें सिखाया "रंजन"
हो गये आज सनम समझदार, खुदा खैर करे ...


राजेंद्र रंजन ..