कविताएँ

gazal..35 ..अपनी जुबान का ख्याल कर प्यारे

अपनी जुबान का ख्याल कर प्यारे ..
फिसलती है रोज संभाल कर प्यारे..
बे-पेंदे के बर्तनों जैसे तुम रहा न करो..
चाय की प्याली में उबाल न कर प्यारे..
अपनों की मौत पर तो दुखी होते हो ..
गरीब की मौत पर सवाल न कर प्यारे ..
बे-मौत मार देते हो ईलाज के नाम पर ..
जलती चिताओं पर मलाल न कर प्यारे ..
राजे-हकीकत सब जानते हैं ' रंजन '
फिर से झूठ का कमाल न कर प्यारे ..
राजेंद्र रंजन ..