कविताएँ

gazal..36..अरसे के बाद आज फिर..

अरसे के बाद आज फिर..
सूरज की किरणें मुंडेर पर ..
अपनी कही-अनकही चाहे..
एक-दूजे से बांटने लगी ..
तभी पास बैठी चिड़िया ..
मीठा सा गीत गाने लगी..
और खिल उठे सारे गुलाब ..
भौरें - तितलियाँ नाचने लगे..
सदा-बहार हरे-पत्ते हंसने लगे..
सयाना कौवा कंहा चुप रहता ?
बोला - हंस लो, गीत गा लो ..
जिन्दगी का हर पल महान हैं..
बस पल दो पल का ये जहान है..
राजेंद्र रंजन .