कविताएँ

gazal..38..मेरा वतन ही मेरी जान है..

मेरा वतन ही मेरी जान है..
मैं क्या ! जिन्दगी कुर्बान है..

राजा हो या रंक यार ! मेरे ..
देश से ही हमारी पहचान है..
उंच-नीच / भाषा - वाद छोडो ..
एक तिरंगा ही हमारी पहचान है..
पाखंड -आडम्बर सब बकवास है ..
इंशानियत ही सबसे बड़ा ईमान है..
चादर से बाहर पांव फैलाया न करो..
सीधा -साधा सा मेरे गुरु का ज्ञान है..
राजेंद्र रंजन ..