कविताएँ

gazal..39..क्या खोया - पाया पूछा न करो ..

क्या खोया - पाया पूछा न करो ..
क्यों रोती हैं आँखें पूछा न करो..
तुम थे तो लगता सब कुछ था..
कैसे थे बीते दिन पूछा न करो..
यार कल भी दुनिया पागल थी..
आज कैसी है वो पूछा न करो ..
मेरे रोने पर खफा होते हो..
क्यों हँसता हूँ पूछा न करो ..
बागबां हैं तो बहारें आएँगी ' रंजन '
कैसे उझड़ता है चमन पूछा न करो..
राजेंद्र ' रंजन..