कविताएँ

gazal ..40..बदलते मौसम से बेहद परेशान हूँ..

बदलते मौसम से बेहद परेशान हूँ..
बदकिस्मत तन्हा गरीब इन्शान हूँ ..

जिन्दा है तो दुनिया में जीना ही पड़ेगा..
आबाद दुनिया में खालिस बियाबान हूँ ..

किस्मत का ग़मों से पुराना नाता है..
जमीनी हालातों से उझड़ा मकान हूँ..

जानलेवा होती है दुनिया की बेरुखी ..
रस्मे-जमाना निभाने में नादान हूँ..

मुफलिसी ज़ाहिर करूँ तो कैसे करूँ ..
दुनिया समझती 'रंजन ' धनवान हूँ..

राजेंद्र रंजन .