कविताएँ

gazal..41..यह मौसमे-गुलेबहार तेरे लिए है..

यह मौसमे-गुलेबहार तेरे लिए है..
सजा खुशबुओं का हार तेरे लिए है..

वादियों में गूंजती हैं मीठी बातें तेरी ..
झुकते बादलों का प्यार तेरे लिए है..

तारे-सितारे तुम्हे देखकर छेड़ते हैं राग ..
खनकते साजों की झंकार तेरे लिए है..

बारगाहे-इलाही रौशन करने का वक़्त है..
रफ्ता-रफ्ता आ रहा करार तेरे लिए है..

भटके मुसाफ़िर मंजिलों पर आ गए ..
दीवानों की लम्बी कतार तेरे लिए है..

राजेंद्र रंजन ..