कविताएँ

ग़ज़ल ..५ सिमटती रात

सिमटती गयी रौशन रात यारों ,
अधूरी पड़ी है मुलाकात यारों ...

जवाबों में उम्र  ढल  जाएगी,
कितने  करोगे सवालात  यारों ..

रोके से भी रुक सकता नहीं,
चाहे कितनी दो सौगात यारों ...

इरादों की शमां रौशन हुई है,
तारीफियों की हुई मात यारों ...

मुरादें मिली है तेरी बात लेकर ,
तेरी बात लेकर करें बात यारों  ...

ऐ "रंजन" उसी का करम है  वरन,
ये क्या है इन्सान  की जात यारों ...


राजेंद्र रंजन ...