कविताएँ

ग़ज़ल 6..बेगाना हो गया

आइने का मुस्कुराना हो गया,
रूप का मंजर लुभाना हो गया ...

धूप थी मौसम सुहाना हो गया,
आपका यूँ गुनगुनाना  हो गया ...

खुश्क पेड़ों पर बहारें आ गई,
आपका यूँ  मुस्कुराना हो गया ...


इश्क-प्यार और यार -जिन्दगी..
सब कुछ प्यार का तराना हो गया ...

जिन्दगी की रूह प्यार है "रंजन"
जो समझा नहीं बेगाना  हो गया ..

राजेंद्र रंजन...